विकास आयुक्त अजय कुमार सिंह ने कहा : युवाओं में है वन्य जीवों के प्रति संवेदनशील, इस सोच का वन्यजीव संरक्षण में लाभ उठायें
रांची: विकास आयुक्त अजय कुमार सिंह ने कहा कि आज की जेन-जी वन्यजीवों और पशु-पक्षियों के प्रति संवेदनशील है। घर का कोई व्यक्ति भी सड़क पर पालतू जानवरों को नहीं मार सकता है. इसका विरोध बच्चे कर देते हैं. युवाओं के इस संवेदनशीलता का उपयोग वन्यजीव संरक्षण के लिए किया जाना चाहिए। वन विभाग को जेन-जी को वन्यजीवों की सुरक्षा से जोड़ने की पहल करनी चाहिए। इससे संरक्षण के प्रति जनभागीदारी बढ़ेगी और विभाग के प्रयासों को भी मजबूती मिलेगी।अजय कुमार सिंह मंगलवार को वन्यजीव संरक्षण को लेकर आयोजित कार्यशाला को संबोधित कर रहे थे। उन्होंने कहा कि विकास और पर्यावरण संरक्षण के बीच बेहतर तालमेल जरूरी है। वन विभाग को समाज के विभिन्न वर्गों के साथ समन्वय बनाकर वन्यजीव संरक्षण के प्रयासों को आगे बढ़ाना चाहिए।
वन विभाग के सचिव अबु बक्कर सिद्दीकी ने कहा कि वन्यजीवों को मानवीय संवेदना के साथ देखने की जरूरत है। वे हमारे दैनिक जीवन और पर्यावरण का अभिन्न हिस्सा हैं। उन्होंने वन्यजीवों को होने वाले नुकसान के कारणों को चिन्हित कर उनके समाधान की दिशा में काम करने पर जोर दिया।
वन्यजीव पारिस्थितिकी तंत्र का अहम हिस्सा
पीसीसीएफ (हॉफ) संजीव कुमार ने कहा कि वन्यजीव पारिस्थितिकी तंत्र का महत्वपूर्ण हिस्सा हैं। उनका संरक्षण मानव जीवन और पर्यावरण के संतुलन के लिए आवश्यक है। पीसीसीएफ वन्यजीव रवि रंजन ने बताया कि इस वर्ष 72वां वन्यजीव सप्ताह मनाया जा रहा है। वन्यजीव संरक्षण को लेकर देश में चिंता और प्रयास कई दशक पहले शुरू हो चुके हैं और समय के साथ इसके लिए कई कानून भी बनाए गए।
कार्यशाला में वाइल्डलाइफ इंस्टीट्यूट ऑफ इंडिया के वैज्ञानिक डॉ. आयन संधु ने झारखंड में हाथी और बाघों के सामने मौजूद चुनौतियों पर वैज्ञानिक तथ्य प्रस्तुत किए। वहीं, एक्सएलआरआई के प्रो. रघुराम टाटा ने दलमा इको-सेंसिटिव जोन से जुड़े विषयों पर अपनी बात रखी। वन्यजीव सप्ताह का समापन बुधवार 7अक्टूबर को होगा।
