छठ पर्व के पहले मशीन से हो रही है कांके डैम से जलकुंभी की सफाई

लेकिन ये फौरी समाधान, सरकार को कांके डैम को संवारने के लिये करनी होगी युद्धस्‍तर की पहल

:::आयुष पाठक:::

रांची : शहर के बीच स्थित कांके डैम (गोंदा) की साफ सफाई अभी मशीन के माध्‍यम से की जा रही है। छठ व्रत को लेकर डैम से जलकुंभी निकाला जा रहा है। रांची शहर के अंद ही डैम के होने के कारण कई इलाकों के हजारो लोग इसके घाट पर छठ करने आते हैं। वर्तमान में डैम का एक बड़ा क्षेत्र जलकुंभी से भरा हुआ है जिसे तेजी से हटाया जा रहा है। डैम के चारो ओर के घाटों पर छठ पर्व मनाया जाता है। गोंदा पहाड़ी की ओर से डैम के बांध के किनारे किनारे सरकार द्वारा छठ घाट बनाया है।

डैम की कभी नहीं हुयी सफाई

1960 में कांके डैम के बनने के बाद से लेकर इसके शिल्‍ट (

गाद) की आज तक कभी सफाई नहीं हुयी। इस कारण से कांके डैम उथला हो चुका है और कम बारिश में भी यह लबालब भर जाता है जिससे इसका फाटक खोल कर पानी निकालना पड़ता है। इसके साफ सफाई को लेकर प्‍लान भी बने पर उसपर ठोस काम कभी नहीं हुआ। आधे शहर को पयजल उपलब्‍ध कराने वाले कांके डैम के जीर्णोद्धार की आवश्‍यकता है। सरकारी स्‍तर पर सिर्फ पर्व  त्‍यौहारों में जलकुंभी हटाने और घाटों की साफ सफाई इसका फौरी समाधान है। कांके डैम से हाल के कुछ वर्षो में अतिक्रमण हटाये गये हैं, पर रसूखदारों के बड़े मकान आज भी डैम की जमीन पर स्थित हैं। कांके डैम को गर्मियों में जब पानी सूख जाता है तब युद्ध स्‍तर पर साफ सफाई की आवश्‍यकता है।

पहले डैम का पानी साफ और नीला था अब प्रदूषित होकर हरा हुआ

शहर के पेयजल की आवश्‍यकताओं को ध्‍यान में रख कर 1960 में इस डैम का निर्माण हुआ था। तब कई बस्‍तियों को यहां से विस्‍थापित किया गया था। 90 के दशक तक कांके डैम का पानी बिल्‍कुल स्‍वच्‍छ और नीला हुआ करता था। इसके चारो ओर का इलाका रमणिक और सुंदर था। यहां जलीय पक्षियों की भीड़ रहती थी। जाड़े में तरह तरह के आप्रवासी पक्षियों के कलरव से डैम गुजायमान रहता था।अब इन आप्रवासी पक्षियों की संख्‍या भी घटी है।

राजधानी बनने के बाद शहर में जनसंख्‍या बढी, अतिक्रमण हुये और लोग इस जलाशय में मरे हुये पशुओं, विसर्जन के लिये कचड़ा, घर के वेस्‍ट डालने से डैम का जल प्रदूषित होते चला गया। तब डैम में जलकुंभी का नामो निशान नहीं था। आज तकरीबन सालो भर यह जल‍कुंभी से भरा रहता है। डैम में आकर मिलने वाली सभी नदी नाले अतिक्रमित होकर लुप्‍त हो चुके हैं और पंडरा पुल के नीचे से बहने वाली नदी ही इसका एकमात्र प्रदूषित और लुप्‍त हो रही नदी है। आज भले ही कांके डैम जाने के रास्‍तों पर सुंदर रमणिक कांके डैम जल विहार के बोर्ड लगे हुये हैं पर सरकारी उदासीनता और प्रमाद के कारण कांके डैम अपनी रमणीकता और स्‍वच्‍छता को खो रहा है।

 

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