कमजोर मॉनसून को देखते हुये किसानों के हित में बनायें योजनायें
रांची : मुख्यमंत्री हेमन्त सोरेन ने झारखंड मंत्रालय में कृषि, पशुपालन एवं सहकारिता विभाग की उच्चस्तरीय समीक्षा बैठक में अधिकारियों को निर्देश दिया कि सरकार की सभी किसान हितैषी योजनाओं का लाभ अंतिम किसान तक समयबद्ध, पारदर्शी और जवाबदेही के साथ पहुंचे। उन्होंने कहा कि किसानों को खाद, बीज, तकनीकी मार्गदर्शन, सिंचाई और अन्य आवश्यक संसाधन समय पर उपलब्ध कराना विभाग की प्राथमिक जिम्मेदारी है।
मुख्यमंत्री ने राज्य में आधुनिक एवं तकनीक आधारित कृषि को बढ़ावा देने पर जोर देते हुए सभी जिलों में कम से कम एक मॉडल कृषक पाठशाला स्थापित करने और किसानों को नवीनतम कृषि तकनीकों का प्रशिक्षण देने का निर्देश दिया। उन्होंने दलहन एवं मिलेट की खेती को बढ़ावा देने, बंजर एवं परती कृषि योग्य भूमि का उपयोग सुनिश्चित करने तथा प्रत्येक वर्ष सभी प्रमंडलों में कृषि व्यापार मेले आयोजित करने की बात कही।
उन्होंने किसान समृद्धि योजना के प्रभावी क्रियान्वयन पर विशेष बल देते हुए अधिक से अधिक किसानों को सौर ऊर्जा संचालित पंपसेट उपलब्ध कराने के निर्देश दिए। साथ ही जरेडा के सहयोग से पीएम कुसुम योजना और किसान समृद्धि योजना के बेहतर समन्वय पर जोर दिया, ताकि खेती की लागत कम हो और किसान आत्मनिर्भर बन सकें।
कम वर्षा और संभावित सूखे की स्थिति को देखते हुए मुख्यमंत्री ने वैकल्पिक फसलों, विशेषकर दलहन एवं मिलेट, को प्रोत्साहित करने, जल संरक्षण, जैविक खेती तथा कम पानी वाली कृषि पद्धतियों को बढ़ावा देने के निर्देश दिए। उन्होंने विशेष रूप से पलामू सहित कम वर्षा वाले क्षेत्रों के लिए अलग कार्ययोजना तैयार करने को कहा।
मुख्यमंत्री ने मशरूम उत्पादन, मधुमक्खी पालन, मत्स्य पालन, डेयरी, बकरी, सूकर और कुक्कुट पालन को ग्रामीण आय बढ़ाने का महत्वपूर्ण माध्यम बताते हुए इनके विस्तार पर जोर दिया। प्रत्येक जिले में मशरूम प्रशिक्षण केंद्र स्थापित करने, महिला किसान समूहों को इससे जोड़ने तथा मधुमक्खी पालकों को सुरक्षा किट उपलब्ध कराने के निर्देश भी दिए।
उन्होंने प्रत्येक जिले में किसी एक गांव या पंचायत को कृषि मॉडल के रूप में विकसित करने, मिट्टी परीक्षण, सिंचाई, प्रशिक्षण और स्थानीय युवाओं की भागीदारी के साथ पायलट परियोजना चलाने का सुझाव दिया। साथ ही यह सुनिश्चित करने को कहा कि सरकारी योजनाओं का लाभ अधिकाधिक पात्र किसानों तक पहुंचे, न कि केवल सीमित लाभार्थियों को बार-बार मिले।
पशुपालन क्षेत्र की समीक्षा करते हुए मुख्यमंत्री ने दुग्ध उत्पादन बढ़ाने, पशुपालकों का डाटाबेस तैयार करने, ब्रिडिंग फार्मों में सुधार, आधुनिक पशु चिकित्सालय, नियमित टीकाकरण तथा प्रमंडल स्तर पर पशु मेलों के आयोजन के निर्देश दिए। उन्होंने खनन क्षेत्रों में कृषि के विकल्प के रूप में पशुपालन आधारित व्यावसायिक मॉडल विकसित करने पर भी बल दिया।
सहकारिता क्षेत्र में लैम्प्स एवं पैक्स को अधिक सक्रिय बनाने, कृषि उत्पादों की खरीद, भुगतान प्रणाली, कम्प्यूटरीकरण, बीज वितरण नेटवर्क तथा सहकारी संस्थाओं को उत्कृष्टता केंद्र के रूप में विकसित करने के निर्देश दिए।
बैठक के दौरान मुख्यमंत्री ने वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के माध्यम से किसान पाठशालाओं और किसानों से संवाद कर योजनाओं की जमीनी स्थिति की जानकारी ली तथा अधिकारियों को नियमित निगरानी, पारदर्शिता और विभागीय समन्वय के साथ कृषि एवं ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मजबूत करने के निर्देश दिए।
