कितना संभव है? रांची में नदियों और जलाशयों से अतिक्रमण हटाना

  • कई कॉलोनी पूरी तरह नदियों तालाबों को लुप्‍त कर बने हैं, उन्‍हें हटाना अब नामुमकिन।
  • पहले भी कई बार जलाशयों और नदियों के अतिक्रमण को हटाने के असफल प्रयास हो चुके हैं।
  • सिर्फ छोटे मोटे अस्‍थायी निर्माणों को हटा कर खानापुर्ति की जाती रही है।
  • रांची के तकरीबन सारे तालाब और नदियां प्रदूषण और अतिक्रमण की शिकार हैं।
  • बड़े और रसूखदारों के अवैध निर्माण की ओर प्रशासन ताकता भी नहीं।

:::मनोज कुमार शर्मा:::

हाल ही में झारखंड के मुख्‍यमंत्री हेमंत सोरेन ने राजधानी रांची में नदियों तालाबों को अतिक्रमण मुक्‍त करने का आदेश दिया है। उन्‍होंने सख्‍ती से इसपर अमल करने की बात कही है। जल जंगल जमीन से नाता रखने वाले मुख्‍यमंत्री की चिंता जायज है, लेकिन सरकारों के नाक के नीचे लंबे समय तक जलाशयों के आस पास इतना अतिक्रमण और नदियों तालाबों का विलुप्तिकरण हुआ है कि अब सरकार चाह कर भी नुकसान की भरपाई नहीं कर सकती। इसका एक उदाहरण कोकर स्थित डिस्टिलरी तालाब का गायब होना है।

कांके डैम में यहां अवैध होटल था जिसे प्रशासन ने तोड़ दिया तो अब यहां शिव मंदिर (नारंगी रंग का निर्माण )बन रहा है

भगवान बचा लेते हैं अमिक्रमणकारियों को :अक्‍सर अतिक्रमणकारियों द्वारा कॉलोनियों में जलाशयों की ओर से कोई मंदिर या धार्मिक स्‍थल बना दिया जाता है और वहां पूजा अर्चना शुरू हो जाता है। बड़े धार्मिक आयोजन होने लगते हैं। इसके बाद प्रशासन के लिये भी वहां से अतिक्रमण हटाना और धार्मिक स्‍थल को तोड़ना चुनौती बन जाता है।

अतिक्रमण से नदी से पतले नाले में बदली पंडरा की नदी :पंडरा कृषि बाजार से आगे पुल के नीचे से गुजरने वाली नदी कभी डेढ सौ मीटर चौड़ी थी। गर्मियों में सूखने पर नदी के कैचमेंट में धड़ल्‍ले से म‍कान बनते गये। जमीन दलालों ने जमीन लूट कर कौड़ी के भाव में लोगों को बेचा ऐसा सालों तक होता रहा और इस नदी के दोनों ओर घनी आबादी वाली एक बस्‍ती बस गयी। प्रशासन सोया रहा। नदी को जहां -तहां बांध कर रोक दिया गया और उसपर पतली सड़क तक बना दी गयी। कभी कांके डैम का मुख्‍य जलस्‍त्रोत रही यह नदी अब एक पतले गंदे नाले में तब्दिल हो चुकी है। पंडरा पुल के पास से इनर रिंग रोड निर्माण के कारण इसमें मिट्टी और कचड़ा भर गया और नदी मरणासन्‍न है।

हरमू नदी के उद्गम स्‍थल पर ही संकट: पिछले साल हरमू नदी के उद्गम स्‍थल पर एक कंस्‍ट्रक्‍शन कंपनी ने  अपना बिल्‍डिंग मटेरियल डंप कर दिया। धूल और बजरी जैसे सामानों से नदी का उद्गम ही बंद हो गया।रांची शहर से होकर गुजरने वाली हरमू नदी की साफ सफाई और अक्रिमण मुक्ति का मजाक लंबे समय से चल रहा है।अब उसके उद्गम स्‍थल के पास ही कई विशालकाय गगनचुंबी अपार्टमेंट बन चुके हैं और भविष्‍य में यह नदी पूरी तरह से एक नाले में बदल जायेगी।

पंडरा और हरमू नदी का अतिक्रमण और बर्बादी एक दो उदाहरण है। ऐसी ही हालत पोटपोटो, बोरेया, कांके डैम, स्‍वर्णरेखा से लेकर हर जगह है। कई तालाब तो लुप्‍त हो गये या सौंदर्यीकरण के नाम पर पानी के टब बन कर रह गये । उनका इकोसिस्‍टम और आकार गायब हो चुका है। अतिक्रमण की शुरूआत में ही सख्‍त कार्रवाइ नहीं करने के कारण सालों तक जमीन दलाल और भूमाफिया निर्भय होकर नदी तालाबों की जमीन को बेचते गये और कम कीमत के लालच में गरीबों से लेकर सक्षम लोगों ने भी जमीन खरीद बड़े निर्माण कर लिये। अब इन कॉलोनियों और निर्माण को हटाना सरकार के लिये मुश्किल  है।  कोर्ट के सख्त  रवैये और  सरकारों पर तल्‍ख टिप्‍पणी और आदेश के बाद भी जलाशयों का अतिक्रमण अनवरत जारी है।

नदी आखिर कहां जायेगी ?

पठारी क्षेत्र होने के कारण रांची के नदी -नाले सालो भर जल से भरे नहीं होते। गर्मियों में ये तकरीबन सूख जाते हैं। तब अतिक्रमण कर कैचमेंट एरिया में भी सैकड़ो मकान बना लिये जाते हैं और नदियों को एक पतले नाले के रूप में छोड़ दिया जाता है। मॉनसून में जब जोरदार बारिश होती है तो ये नदियां अपने पुराने रास्‍ते तलाशते जलप्रवाह के साथ आगे बढती हैं ,रास्‍ता बंद होने पर वह आस पास के कॉलोनियों में ही फैल जाती है, मकान गिरते हैं, बस्तियों में पानी भर जाता है और लोग डूबते मरते हैं, कई बार तो डूबने वालों का शव तक नहीं मिलता।  रांची के हर इलाके में बरसाती नदियों और नालों के ऊपर बने  कॉलोनियों में ये वाकया आम है।

जो है उसे बचा सकते हैं:  अतिक्रमण और विलुप्ति के बाद भी रांची में बहुत सारे जलाशय और नदी नाले ऐसे हैं जहां प्रशासन और सरकार ठोस कदम उठाये तो उसे बचाया जा सकता है। नदियों के रास्‍तों में बने निर्माणों का सफाया, कूड़ा कचड़ा डंपिंग को हर हाल में रोकना, बड़े अतिक्रमित निर्माणों को कठोरता से ध्‍वस्‍त कर यह संदेश कि सरकार बख्‍शने की मूड में नहीं,  कानूनी कार्रवाई से भय पैदा कर नजीर पेश करने से इस पर लगाम लगाया जा सकता है। अन्‍यथा क्‍लीन रांची ग्रीन रांची  और  ‘आइ लव रांची’ बैनर के साथ सेल्फि बेमानी होता जायेगा।

 

 

 

 

 

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