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25 Oct, 2026
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कपास चुनने वाले श्रमिकों को मिलेगी सुरक्षा, भाकृअनुप-सिरकॉट ने किया समझौता
क्‍या झारखंड के शहरों में घट रहे हैं? ‘बेहया’
तीसी: कभी हिकारत से देखा जाता था, आज लोग दिल में बसाने को बेताब
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कपास चुनने वाले श्रमिकों को मिलेगी सुरक्षा, भाकृअनुप-सिरकॉट ने किया समझौता

  • 24 Oct 2026

नई दिल्ली, भाकृअनुप–केंद्रीय कपास प्रौद्योगिकी अनुसंधान संस्थान (ICAR-CIRCOT), मुंबई ने कपास चुनने वाले श्रमिकों की सुरक्षा के लिए विकसित सुरक्षात्मक दस्तानों की तकनीक के हस्तांतरण हेतु मैसर्स ट्रस्ट एआरएस रबर प्राइवेट लिमिटेड, चेंगलपट्टू के साथ समझौता ज्ञापन पर हस्ताक्षर किए हैं। यह समझौता 22 अक्टूबर 2026 को हुआ। इस तकनीक...

क्‍या झारखंड के शहरों में घट रहे हैं? ‘बेहया’

  • 24 Oct 2026

:::मनोज कुमार शर्मा::: बेहया ,बेशरम, और झारखंड में थेथर नाम से जाना जाने वाला एक पौधा है। इस पौधे का ये नाम इसके बिना किसी अनुकूल परिस्थिति के भी किसी न किसी तरह से वापस पुरजोर तरीके से पनप जाने के कारण है। यह कहीं भी  नदी, नाला, दलदल या...

तीसी: कभी हिकारत से देखा जाता था, आज लोग दिल में बसाने को बेताब

  • 21 Oct 2026

हृदय रोग और मधुमेह में लाभ का गुण पता चलते ही तीसी अब मॉल एवं बड़े दूकानों में पैक होकर बिकने लगा मनोज कुमार शर्मा रांची : तिलहन का एक प्रमुख उपज रहा है तीसी। इसे अलसी भी कहते हैं अंग्रेजी में इसे फलेक्‍सीड कहते हैं । कुछ दशक पहले...

क्‍या झारखंड से लुप्‍त हो चुके हैं ?’वनकुकुर’

  • 21 Oct 2026

:::मनोज कुमार शर्मा::: मई 2025 में एक खबर पढा था जिसमें झारखंड के बेतला पार्क में बाघों की संख्‍या के 1 से बढ कर 6 हो गयी है, पर अन्‍य वन्‍यजीवों की संख्‍या घटी है। जिसमें प्रमुख रूप से वनकुकुर (वाइल्‍ड डॉग) को तकरीबन लुप्‍त मान लिया गया है। मेरे...

रांची में जल संकट : सामलौंग के भुइंया टोली में दर्जनों बोरिंग सूखे, लोग पानी खरीदने को मजबूर, ज्यादा पैसे देकर करा रहे बोरिंग

  • 8 Jun 2024

रीतु लाकड़ा पीजी इंटर्न, स्‍कूल ऑफ मास कम्‍युनिकेशन रांची विश्‍वविद्यालय, रांची रांची शहर के विभिन्न इलाकों में पानी का स्तर नीचे जाने से बोरिंग से पानी आना बंद हो गया है। वार्ड नंबर 13 के सामलौंग, भुइंया टोली की भी स्थिति इससे अलग नहीं है। पिछले एक महीने में क्षेत्र...

झारखंड में सस्टेनेबल मोबिलिटी को गति देने के लिए सीड और ओएमआई फाउंडेशन के बीच हुआ शोध-सहयोग

  • 8 Jun 2024

रीतु लाकड़ा पीजी इंटर्न, स्‍कूलऑफ मास कम्‍युनिकेशन रांची विश्‍वविद्यालय,रांची रांची। झारखंड में सस्टेनेबल मोबिलिटी (सततशील यातायात) व्यवस्था को बढ़ावा देने और जस्ट ट्रांजिशन की प्रक्रिया को मजबूत करने के लिए सेंटर फॉर एनवायरनमेंट एंड एनर्जी डेवलपमेंट (सीड) और ओएमआई फाउंडेशन मिलकर शोध-अध्ययन एवं डेवलपमेंट रोडमैप तैयार करेंगे। यह साझेदारी सततशील...

इंडोर गार्डनिंग का बढ़ा क्रेज

  • 8 Jun 2024

पूनम कुमारी पीजी इंटर्न,स्‍कूल ऑफ मास कम्‍युनिकेशन रांची विश्‍वविद्यालय, रांची आजकल इंडोर गार्डेनिंग एक चर्चित विषय है। लोग अपने घरों के अंदर छोटे-छोटे स्पेस में पौधों को उगाने का शौक लगा रहे हैं. यह विशेष रूप से शहरों में रहने वाले लोगों के बीच प्रचलित हो रहा है, जहां गंदा...

महुआ फल है औषधीय गुणों का खजाना, जानें चौंकाने वाले फायदे

  • 8 Jun 2024

अमित कुमार महतो पीजी इंटर्न, स्‍कूल ऑफ मास कम्‍युनिकेशन रांची विश्‍वविद्यालय, रांची डेस्क (अमित कुमार महतो) आदिवासी परंपरा में महुआ का रोल बहुत ही महत्वपूर्ण है। कहा जाता है कि जब भोजन की समस्या आती थी तो आदिवासी समाज महुआ के फूल-फल को खाकर अपना जीवन गुजारते थे। झारखंड में...

साहेबगंज में गाद के कारण सिकुड़ रही है गंगा, जैव विविधता और डॉल्फ़िन को खतरा

  • 8 Jun 2024

विश्‍वजीत मरांडी पीजीइंटर्न, स्‍कूल ऑफ मास कम्‍युनिकेशन रांची विश्‍वविद्यालय, रांची नदी डॉल्फ़िन एक स्वस्थ नदी के संकेतक हैं और नदी पारिस्थितिकी तंत्र के लिए छत्र प्रजाति के रूप में काम करते हैं। गंगा नदी डॉल्फ़िन (प्लैटनिस्टा गैंगेटिका गैंगेटिका) को वर्तमान में IUCN रेड लिस्ट में लुप्तप्राय के रूप में वर्गीकृत...

बरगद का वृक्ष: धर्म, पर्यावरण और हमारा जीवन

  • 8 Jun 2024

प्रतिमा प्रिया यूजीइंटर्न, स्‍कूल ऑफ मास कम्‍युनिकेशन रांची विश्‍वविद्यालय, रांची आज जब कई भारतीय राज्य भयावह गर्मी की स्थिति में त्राहिमाम त्राहिमाम कर रहे हैं , शुक्रवार 6 जून 2024 को झारखंड की राजधानी रांची, पलामू और राजमहल समेत राज्य के सभी हिस्सों में वट सावित्री पूजन का पर्व धूमधाम...

जल-जंगल-जमीन

क्‍या झारखंड के शहरों में घट रहे हैं? ‘बेहया’

  • 24 Oct 2026

:::मनोज कुमार शर्मा::: बेहया ,बेशरम, और झारखंड में थेथर नाम से जाना जाने वाला एक पौधा है। इस पौधे का...

रांची में जल संकट : सामलौंग के भुइंया टोली में दर्जनों बोरिंग सूखे, लोग पानी खरीदने को मजबूर, ज्यादा पैसे देकर करा रहे बोरिंग

  • 8 Jun 2024

रीतु लाकड़ा पीजी इंटर्न, स्‍कूल ऑफ मास कम्‍युनिकेशन रांची विश्‍वविद्यालय, रांची रांची शहर के विभिन्न इलाकों में पानी का स्तर...

हाथियों के आतंक से डर के साए में जी रहा है सिमडेगा जिला

  • 8 Jun 2024

::::मो. इरशाद:::: सिमडेगा जिले में विगत 23 वर्षों में हाथी के प्रकोप से बचाव को लेकर स्थायी समाधान नहीं निकल...

भू जल स्तर में गिरावट, पानी के लिए तरस रहे लोग

  • 3 Jun 2024

बिपुल कुमार तिवारी पीजी इंटर्न,स्‍कूल ऑफ मास कम्‍युनिकेशन, रांची विश्‍वविद्यालय, रांची रांची जिले में इस गर्मी गंभीर जल संकट देखने...

झारखंड-झरोखा

खेती-बाडी

कपास चुनने वाले श्रमिकों को मिलेगी सुरक्षा, भाकृअनुप-सिरकॉट ने किया समझौता

  • 24 Oct 2026

नई दिल्ली, भाकृअनुप–केंद्रीय कपास प्रौद्योगिकी अनुसंधान संस्थान (ICAR-CIRCOT), मुंबई ने कपास चुनने वाले श्रमिकों की सुरक्षा के लिए विकसित सुरक्षात्मक...

तीसी: कभी हिकारत से देखा जाता था, आज लोग दिल में बसाने को बेताब

  • 21 Oct 2026

हृदय रोग और मधुमेह में लाभ का गुण पता चलते ही तीसी अब मॉल एवं बड़े दूकानों में पैक होकर...

सिकीदिरी के श्‍यामसुंदर बेदिया की फूलों की सुंदर बगिया

  • 30 May 2024

पूनम कुमारी पीजी इंटर्न, स्‍कूल आफ मास कम्‍युनिकेशन रांची विश्‍वविद्यालय, रांची यूं तो लोग अपने घर-जमीन को छोड़कर नगर में...

सरकार की मशरूम खेती पर जोर, बेरोजगारों को मिलेगा रोजगार का नया जरिया

  • 28 May 2024

अमित कुमार महतो पीजी इंटर्न,स्‍कूल ऑफ मास कम्‍युनिकेशन रांची विश्‍वविद्यालय,रांची देश में किसान अब मशरूम की खेती पर ज्यादा जोर...

पर्यावरण

क्‍या झारखंड के शहरों में घट रहे हैं? ‘बेहया’

  • 24 Oct 2026

:::मनोज कुमार शर्मा::: बेहया ,बेशरम, और झारखंड में थेथर नाम से जाना जाने वाला एक पौधा है। इस पौधे का...

झारखंड में सस्टेनेबल मोबिलिटी को गति देने के लिए सीड और ओएमआई फाउंडेशन के बीच हुआ शोध-सहयोग

  • 8 Jun 2024

रीतु लाकड़ा पीजी इंटर्न, स्‍कूलऑफ मास कम्‍युनिकेशन रांची विश्‍वविद्यालय,रांची रांची। झारखंड में सस्टेनेबल मोबिलिटी (सततशील यातायात) व्यवस्था को बढ़ावा देने...

इंडोर गार्डनिंग का बढ़ा क्रेज

  • 8 Jun 2024

पूनम कुमारी पीजी इंटर्न,स्‍कूल ऑफ मास कम्‍युनिकेशन रांची विश्‍वविद्यालय, रांची आजकल इंडोर गार्डेनिंग एक चर्चित विषय है। लोग अपने घरों...

साहेबगंज में गाद के कारण सिकुड़ रही है गंगा, जैव विविधता और डॉल्फ़िन को खतरा

  • 8 Jun 2024

विश्‍वजीत मरांडी पीजीइंटर्न, स्‍कूल ऑफ मास कम्‍युनिकेशन रांची विश्‍वविद्यालय, रांची नदी डॉल्फ़िन एक स्वस्थ नदी के संकेतक हैं और नदी...

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