मनोज कुमार शर्मा
मुख्यमंत्री हेमन्त सोरेन ने मंगलवार को झारखंड मंत्रालय में वन, पर्यावरण एवं जलवायु परिवर्तन विभाग की उच्चस्तरीय समीक्षा बैठक में राज्य के सभी वन क्षेत्रों का एक माह के भीतर तकनीकी एवं डिजिटल रिकॉर्ड तैयार करने का निर्देश दिया। उन्होंने कहा कि डिजिटल मैपिंग और लेयरिंग के माध्यम से वन क्षेत्रों की अद्यतन जानकारी एक क्लिक पर उपलब्ध होनी चाहिए, ताकि वन संरक्षण और प्रबंधन को वैज्ञानिक आधार मिल सके।
मुख्यमंत्री ने कहा कि पौधरोपण अभियान केवल संख्या बढ़ाने तक सीमित न रहे, बल्कि स्थानीय पारिस्थितिकी तंत्र और ग्रामीणों की आजीविका के अनुरूप हो। उन्होंने महुआ, जामुन, करंज, पलाश, कुसुम, अर्जुन, बैर जैसे उपयोगी और फलदार पौधों के व्यापक रोपण पर जोर देते हुए कहा कि इससे जैव विविधता के संरक्षण के साथ ग्रामीणों की आय और लाह-तसर उद्योग को भी बढ़ावा मिलेगा।
बैठक में मुख्यमंत्री ने वन पट्टा के लंबित मामलों का शीघ्र निष्पादन, जंगली हाथियों से प्रभावित लोगों को त्वरित मुआवजा, हेलीकॉप्टर से बीज बिखेरने की योजना, तथा “एक पेड़ लगाएं, पांच यूनिट मुफ्त बिजली पाएं” योजना के व्यापक प्रचार-प्रसार के निर्देश दिए। उन्होंने वन एवं पर्यटन विभाग के समन्वय से इको-टूरिज्म को बढ़ावा देने और राज्य की प्राकृतिक संपदा को पर्यटन के माध्यम से आर्थिक विकास से जोड़ने पर बल दिया।
मुख्यमंत्री ने काजू और बांस की व्यावसायिक खेती को बढ़ावा देने, बांस आधारित उद्योगों और हस्तशिल्प के विकास तथा शहरी क्षेत्रों में बड़े पैमाने पर छायादार पौधों के रोपण के निर्देश भी दिए। उन्होंने कहा कि झारखंड की पहचान उसके घने जंगलों, वन्यजीवों और समृद्ध जैव विविधता से है, इसलिए वन संरक्षण, पर्यावरणीय संतुलन, ग्रामीण आजीविका और सतत विकास को साथ लेकर योजनाओं का प्रभावी क्रियान्वयन सुनिश्चित किया जाए।
बैठक के दौरान मुख्यमंत्री ने सभी जिलों के वन प्रमंडल पदाधिकारियों से ऑनलाइन संवाद कर वन पट्टा वितरण, पौधरोपण, इको-टूरिज्म और अन्य योजनाओं की प्रगति की समीक्षा की तथा प्रदूषण नियंत्रण और पर्यावरणीय मानकों के पालन को लेकर भी आवश्यक दिशा-निर्देश दिए।
