भारतीय युवाओं के लिये साइबर इंश्योरेंस बेहद ज़रूरी

भारतीयों  के सामने है साइबर फ्राड से बड़े नुकसान की चुनौती

अमरनाथ सक्सेना, चीफ टेक्निकल ऑफिसर  

कमर्शियल, बजाज जनरल इंश्योरेंस लिमिटेड

भारत की 26% आबादी ऐसे लोगों की है जिनकी उम्र 15 से 29 साल के बीच है। भारत को इस बात पर गर्व है कि उसके पास युवा प्रतिभाओं की भरमार है। ये युवा डिजिटल तौर-तरीकों को अच्छी तरह से समझते हैं, वे महत्वाकांक्षी हैं और कुछ नया प्रयोग करने से लेकर नए क्षेत्रों में कदम रखने से वे हिचकिचाते नहीं हैं। वे हमारे देश को विकास के अगले स्तर तक ले जाने के लिए पूरी तरह से तैयार हैं।

हालांकि इन उम्मीदों के साथ उन्हें कुछ नए तरह के जोखिमों से दो-चार होना पड़ रहा है, जिसका सामना पिछली पीढ़ी ने कभी नहीं किया था। साइबर धोखाधड़ी करने वाले अपराधी ऑनलाइन ट्रेडिंग अकाउंट को हैक कर सकते हैं, और जो शॉपिंग वेबसाइटें बेहद सुरक्षित और भरोसेमंद दिखाई देती हैं, वहां भी लोग ठगी का शिकार बन सकते हैं। इससे आर्थिक सुरक्षा के लिए खतरा पैदा हो सकता है और यह एक गंभीर समस्या का रूप भी धारण कर सकती है। इसका असर केवल आर्थिक नुकसान तक ही सीमित नहीं रहता, बल्कि इसकी वजह से लोगों को गंभीर तनाव से गुज़रना पड़ता है, उनका मानसिक संतुलन बिगड़ता है और उन्हें चिंताजनक मानसिक स्वास्थ्य समस्याओं का भी सामना करना पड़ता है। इतना ही नहीं, लंबे समय तक स्क्रीन के सामने बैठकर काम करने से लोगों में जीवनशैली से जुड़ी बीमारियां बढ़ रही हैं। वर्ष 2025 में भारत में 7% से अधिक ग्राहकों के साथ डिजिटल लेन-देन के दौरान धोखाधड़ी करने की कोशिश की गई, जो कि वैश्विक दर की तुलना में दोगुनी रही।

डिजिटल खतरों में बढ़ोत्तरी

आज के दौर में स्मार्टफोन और टैबलेट शिक्षा, मनोरंजन से लेकर लोगों से संपर्क बनाने और यहां तक कि करियर बनाने की दिशा में भी अहम भूमिका निभा रहे हैं। रिपोर्टों के अनुसार 15 से 29 साल की उम्र के जिन लोगों के पास मोबाइल है, उनमें से 95.5% लोग ग्रामीण क्षेत्रों से आते हैं, जबकि शहरों में इसी उम्र के 97.6% लोगों के पास अपना स्मार्टफोन है। गौरतलब है कि जहां टेक्नोलॉजी ने भारतीय युवाओं को सशक्त बनाया है, वहीं इसकी वजह से वे गंभीर जोखिमों के प्रति असुरक्षित भी बन गए हैं।

साइबर धोखाधड़ी जैसे कि पहचान चुराना, फिशिंग अटैक और वित्तीय धोखाधड़ी जैसे अपराध दिनोंदिन बढ़ते ही जा रहे हैं। युवा लोग जो अक्सर ऑनलाइन लेन-देन करते हैं, डिजिटल प्लेटफॉर्म के ज़रिए निवेश करते हैं और कई पेमेंट एप्लीकेशन का इस्तेमाल करते हैं, यहां वे अक्सर साइबर अपराधों की वजह से होने वाले आर्थिक नुकसान को गंभीरता से नहीं लेते हैं। राष्ट्रीय साइबर अपराध रिपोर्टिंग पोर्टल (एनसीआरपी) के अनुसार वर्ष 2021 से जून 2025 तक के बीच 65.9 लाख शिकायतें प्राप्त हुईं। ये आंकड़ें दर्शाते हैं कि भारत में न केवल साइबर खतरों से जुड़े मामलों में वृद्धि हुई है, बल्कि ये मामले तेज़ी से बढ़ भी रहे हैं।

सिर्फ एक साइबर घटना आपको भारी आर्थिक नुकसान पहुंचाने, कानूनी दिक्कतों में डालने और भावनात्मक रूप से तोड़ने के लिए काफी हो सकती है। कई युवा नौकरीपेशा लोग इस बात से अनजान होते हैं कि भारत में अब लोगों के लिए खास साइबर इंश्योरेंस पॉलिसियां उपलब्ध हैं। ये पॉलिसियां अनधिकृत डिजिटल लेन-देन, ऑनलाइन शॉपिंग धोखाधड़ी, पहचान चुराना, ऑनलाइन वसूली और साइबर खतरों से प्रभावित हुए डिजिटल उपकरणों को ठीक करने में होने वाले खर्चों के लिए आर्थिक मदद पेश करती हैं।

जैसे-जैसे डिजिटल जीवनशैली हमारी ज़िंदगी का हिस्सा बनती जा रही है, वैसे-वैसे युवा पीढ़ी के लिए साइबर इंश्योरेंस भी हेल्थ इंश्योरेंस जितना ज़रूरी बनते जा रहा है। साइबर अपराधी युवाओं को कई तरह से ठगी का शिकार बना सकते हैं, इसलिए साइबर खतरों से बचने के लिए आपके पास साइबर इंश्योरेंस का होना बेहद ज़रूरी है।

साइबर अपराध और उसे अंजाम देने के तरीके

जब ऑनलाइन शॉपिंग की बात आती है, तो विभिन्न सोशल मीडिया साइटों पर हमें तरह-तरह के विज्ञापन दिखते हैं और ये युवाओं को खासतौर पर आकर्षित करते हैं, क्योंकि इन पर ज़बरदस्त सेल ऑफर नज़र आता है। कई विज्ञापनों में तो ऐसे लुभावने प्रोडक्ट होते हैं, जो युवाओं को लगातार अपनी ओर आकर्षित करते हैं। उसके बाद जैसे ही खरीदार भुगतान कर देते हैं, वैसे ही फर्जी विक्रेता गायब हो जाते हैं। बाद में उनकी ऑनलाइन मौजूदगी का कोई नामोनिशान तक नहीं मिलता। इस तरह की धोखाधड़ी करने वालों को ढूंढने की सारी कोशिशें नाकामयाब हो जाती हैं और खरीदार को अपने पैसे गंवाने पड़ते हैं। कुछ मामलों में ऐसे विज्ञापनों की लिंक पर टैप या क्लिक करने से आपके मोबाइल पर मैलवेयर इंस्टॉल हो सकता है, जिसकी वजह से आपकी पहचान चुराई जा सकती है और यहां तक कि लोगों के पैसों की डिजिटल चोरी हो सकती है और वे ऑनलाइन वसूली का शिकार भी बन सकते हैं। युवाओं को इस बात की भी सावधानी बरतनी चाहिए कि ऑनलाइन लिंक में छिपा मैलवेयर उनके डिवाइसों को खराब कर सकता है।

 

व्यक्तिगत साइबर पॉलिसी लोगों को कई तरह के कवर पेश करती है, जो कि उपरोक्त घटनाओं की वजह से होने वाले आर्थिक नुकसान से सुरक्षा प्रदान करती है। जहां ऑनलाइन शॉपिंग कवर फर्जी शॉपिंग वेबसाइट या ऐप पर की गई खरीदारी से हुए आर्थिक नुकसान से सुरक्षा पेश करता है, वहीं डेटा रिस्टोरेशन कवर मैलवेयर हमले के बाद डिवाइस को सुरक्षित रखने और उसे पुरानी स्थिति में वापस लाने के लिए आईटी पेशेवरों पर होने वाले खर्चों से आपको बचाता है।

स्वास्थ्य संबंधी विकार और इंश्योरेंस की अहमियत

आज के भारतीय युवा जिस चुनौती का सामना कर रहे हैं, वह है जीवनशैली से जुड़ी बीमारियां। हाल के अध्ययन पुष्टि करते हैं कि भारतीय युवाओं में डायबिटीज़, कार्डियक अरेस्ट जैसे मामले तेज़ी से बढ़ रहे हैं, जबकि पहले ये बीमारियां अधेड़ उम्र के लोगों को होती थीं। हाल की रिपोर्टों के अनुसार लगभग 18–40 साल की उम्र के 18% लोग डायबिटीज़ से जूझ रहे हैं, जबकि 25% लोग प्री-डायबिटीक हैं। इससे यह बात पता लगती है कि पहले डायबिटीज़ को अधेड़ उम्र में होने वाला रोग माना जाता था, लेकिन अब यह विचारधारा बदल रही है। अध्ययन दर्शाते हैं कि 40 साल से कम उम्र के लोगों में कार्डियक के मामले बढ़ रहे हैं, जो कि गंभीर चिंता का विषय है।

इन बीमारियों के बढ़ते मामलों को देखते हुए, युवाओं के लिए बेहद ज़रूरी है कि वे अपने लिए एक ज़बरदस्त हेल्थ इंश्योरेंस पॉलिसी ज़रूर चुनें। और तो और युवाओं के लिए यह भी ज़रूरी है कि वे इसे कम से कम उम्र में लें, ताकि सेहतमंद रहते हुए वे पॉलिसी की प्रतीक्षा अवधि पूरी कर लें। इससे यह बात भी पक्की हो जाएगी कि उन्हें फटाफट कवरेज मिलेगा और जब उन्हें इसकी सबसे ज़्यादा ज़रूरत होगी, तब वे इसे अच्छी तरह से इस्तेमाल कर पाएंगे। जब भी हेल्थ इंश्योरेंस चुनने की बात आए, तो सूझबूझ के साथ ऐसी पॉलिसी लें जिसमें ओपीडी कवर शामिल हो। इस तरह का कवर मामूली बीमारी/विकार के इलाज के लिए खासतौर पर फायदेमंद है, जिसमें आपको अस्पताल में भर्ती होने की ज़रूरत नहीं होती और डॉक्टर की सलाह और बताई गई दवाइयों से आसानी से इलाज हो सकता है। इसके अलावा, एक और चुनौती जिसका यह देश सामना कर रहा है वह है कैंसर और दिल से जुड़ी बीमारियों में आ रही तेज़ी। इसी के मद्देनज़र बेहतर है कि आप क्रिटिकल इलनेस पॉलिसी कवर का चयन करें। यह एक लाभ-आधारित पॉलिसी है, जिसमें कैंसर, कार्डियक सर्जरी के साथ-साथ कई दूसरी बीमारियों का पता लगने पर आपको एकमुश्त राशि प्रदान की जाती है।

संक्षेप में, इस डिजिटल दौर में भारत के युवा दर्शाते हैं कि वे इस देश की सबसे बड़ी ताकत तो हैं, लेकिन सबसे ज़्यादा साइबर खतरों का सामना भी इसी वर्ग को करना पड़ता है। जहां स्मार्टफोन और ऑनलाइन प्लेटफॉर्म शिक्षा, करियर और दुनिया से संपर्क बनाने के लिए नए-नए अवसर पेश कर रहे हैं, वहीं इन्हीं के ज़रिए भारतीय युवा साइबर धोखाधड़ी, पहचान की चोरी, मानसिक स्वास्थ्य की समस्या और जीवनशैली से जुड़ी बीमारियों जैसे गंभीर खतरों का सामना भी कर रहे हैं। इन सभी बिंदुओं को देखते हुए पता लगता है कि इन युवाओं को साइबर इंश्योरेंस और हेल्थ इंश्योरेंस दोनों में निवेश करना चाहिए, ताकि वे न केवल डिजिटल धोखाधड़ी से सुरक्षित रहें, बल्कि उनकी सेहत की भी सुरक्षा हो। इससे भारतीय युवा अचानक से आने वाले किसी भी साइबर खतरे से सुरक्षित रहने के साथ-साथ अपनी आकांक्षाएं भी आसानी से पूरी कर पाएंगे।

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