:::मनोज कुमार शर्मा :::
कल शूटिंग के गुरु यशपाल राणा को महज 49 साल में कार्डियेक अरेस्ट ने हमसे छीन लिया। खेलप्रेमियों के लिये ये हतप्रभ करने वाली खबर है। यशपाल राणा को नयी पीढ़ी न के बराबर जानती होगी? वैसे भी क्रिकेट खिलाड़ियों को छोड़ कर किसी और खेल के बड़े खिलाड़ियों को कम ही लोग जानते हैं।
यशपाल राणा जब दसवीं क्लास में थे तभी शूटिंग की सनसनी बन गये थे। एक राष्ट्रीय पाक्षिक पत्रिका में इनकी किशोर उम्र सी तस्वीर छपी थी तब हम जैसे खेल प्रेमियों के लिये वह नेशनल हीरो थे। उस दौर में खिलाड़ी और उसकी उपलब्धि देश के मान सम्मान से ज्यादा जुड़ाव रखती थी। क्योंकि तब देश के लिये खेल में किसी अच्छी खबर का टोटा पड़ा रहता था।
यशपाल राणा अपनी शूटिंग से जब पहली बार एशियाड में गोल्ड जीते थे,तो लगा चलो गोल्ड का खाता तो खुला, भारत अब मेडल लिस्ट में अंडर फाइव तो आ ही जायेगा। चीन, जापान द कोरिया ही नवंबर एक से तीन तक कब्जा जमाते थे और आज भी वही है।
उन्होंने कइ मौकों पर मेडल तालिका में भारत की लाज बचाई। उन्हें अगर शूटिंग का धोनी या तेंदूलकर कहें तो ग़लत नहीं होगा। हम भारतीय उनसे आजीवन शूटिंग करने और मेडल जीतने की हद तक अपेक्षा रखते थे।
बाद में वह राजनीति में आये और भाजपा ज्वाइन कर लिये। तब उनका बयान था कि…
“अब तक राजनीति ने खेलों को प्रभावित किया है अब खेल राजनीति को प्रभावित करेगा”
उनके राजनीतिक पारी का हमें कुछ ज्यादा पता नहीं,लेकिन यशपाल राणा बहुत कम उम्र से ही देश की उम्मीद बन गये थे और कई मौकों पर इस उम्मीद पर वो खरे उतरे।
आज एशियाड कब शुरु होता है और अब खत्म ये बहुतों को पता भी नहीं होता।लेकिन 80-90 के दशक में देश को एशियाड शुरु होने का इंतजार रहता था लोगों को शुभंकर और उसके नाम तक याद रहते थे और रोज अखबारों में नजर मेडल तालिका में भारत की स्थिति पर रहती थी। इस मेडल तालिका में भारत अगर अंडर टेन दिखा तो अक्सर उसमें यशपाल राणा, पीटी उषा,लियेंडर पेस जैसों का ही योगदान रहता था। दुखद खबर कि कभी शूटिंग जैसे खेल के किशोर उम्र में ही सनसनी रहे यशपाल राणा महज 49साल की उम्र में ही हमारे बीच से चले गये।
