::सुजीत कुमार वर्मा::
नई दिल्ली। खदान बंद होने के बाद भूमि का उत्पादक उपयोग, पर्यावरण संरक्षण और सतत सामाजिक-आर्थिक विकास सुनिश्चित करने के उद्देश्य से कोयला मंत्रालय के अधीन कोयला नियंत्रक संगठन (सीसीओ) ने ‘सुविकल्प-माइन रिपर्पोजिंग टूल’ विकसित किया है। यह डिजिटल निर्णय-समर्थन मंच कोयला एवं लिग्नाइट खदानों के लिए खनन योजना दिशानिर्देश, 2025 से जुड़ा है।
सुविकल्प खनन के बाद भूमि के उपयुक्त उपयोग की पहचान के लिए वैज्ञानिक, पारदर्शी और डेटा-आधारित ढांचा उपलब्ध कराता है। इसमें भू-खनन विशेषताओं, पर्यावरणीय स्थिति, बुनियादी ढांचे, वित्तीय एवं सामाजिक-आर्थिक पहलुओं का एकीकृत मूल्यांकन किया जाता है। संभावित पुनर्प्रयोग विकल्पों की तुलना और रैंकिंग के लिए टीओपीएसआईएस आधारित बहु-मापदंड निर्णय प्रणाली का उपयोग किया गया है।
प्लेटफॉर्म में ‘रिक्लेम’ ढांचे के माध्यम से स्थानीय समुदायों की प्राथमिकताओं को भी शामिल किया गया है, ताकि रोजगार, आजीविका और क्षेत्रीय विकास को बढ़ावा मिले।
इसके अतिरिक्त, पीआरआईएसएम (पोस्ट-माइनिंग रीपर्पोजिंग इम्प्लीमेंटेशन स्ट्रैटेजिक मॉडल) परियोजनाओं की पहचान से लेकर उनके क्रियान्वयन तक मार्गदर्शन प्रदान करता है। इसमें केस स्टडी, परियोजना दस्तावेज और सर्वोत्तम कार्यप्रणालियों का ज्ञान भंडार शामिल है। यह पहल खदान बंदी को सतत एवं समावेशी विकास के अवसर में बदलने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम है।
नई दिल्ली। खदान बंद होने के बाद भूमि का उत्पादक उपयोग, पर्यावरण संरक्षण और सतत सामाजिक-आर्थिक विकास सुनिश्चित करने के उद्देश्य से कोयला मंत्रालय के अधीन कोयला नियंत्रक संगठन (सीसीओ) ने ‘सुविकल्प-माइन रिपर्पोजिंग टूल’ विकसित किया है। यह डिजिटल निर्णय-समर्थन मंच कोयला एवं लिग्नाइट खदानों के लिए खनन योजना दिशानिर्देश, 2025 से जुड़ा है।
सुविकल्प खनन के बाद भूमि के उपयुक्त उपयोग की पहचान के लिए वैज्ञानिक, पारदर्शी और डेटा-आधारित ढांचा उपलब्ध कराता है। इसमें भू-खनन विशेषताओं, पर्यावरणीय स्थिति, बुनियादी ढांचे, वित्तीय एवं सामाजिक-आर्थिक पहलुओं का एकीकृत मूल्यांकन किया जाता है। संभावित पुनर्प्रयोग विकल्पों की तुलना और रैंकिंग के लिए टीओपीएसआईएस आधारित बहु-मापदंड निर्णय प्रणाली का उपयोग किया गया है।
प्लेटफॉर्म में ‘रिक्लेम’ ढांचे के माध्यम से स्थानीय समुदायों की प्राथमिकताओं को भी शामिल किया गया है, ताकि रोजगार, आजीविका और क्षेत्रीय विकास को बढ़ावा मिले।
इसके अतिरिक्त, पीआरआईएसएम (पोस्ट-माइनिंग रीपर्पोजिंग इम्प्लीमेंटेशन स्ट्रैटेजिक मॉडल) परियोजनाओं की पहचान से लेकर उनके क्रियान्वयन तक मार्गदर्शन प्रदान करता है। इसमें केस स्टडी, परियोजना दस्तावेज और सर्वोत्तम कार्यप्रणालियों का ज्ञान भंडार शामिल है। यह पहल खदान बंदी को सतत एवं समावेशी विकास के अवसर में बदलने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम है।
