झारखंड में खेत बचाओ अभियान से किसानों को नई राह, 10 लाख हेक्टेयर अम्लीय मिट्टी सुधारने पर जोर

झारखंड में खेती की जमीन की उर्वरा शक्ति बचाने और किसानों को टिकाऊ कृषि पद्धतियों से जोड़ने के लिए केंद्र सरकार का ‘खेत बचाओ अभियान’ चलाया जा रहा है। 22 अक्टूबर से 30 नवंबर तक संचालित इस अभियान के तहत राज्य के विभिन्न जिलों में किसानों को मिट्टी संरक्षण, संतुलित उर्वरक उपयोग और वैज्ञानिक खेती के प्रति जागरूक किया जा रहा है।

राज्य में लगभग 10 लाख हेक्टेयर कृषि भूमि की मिट्टी अम्लीय बताई गई है। ऐसे में मिट्टी की जांच और उसके अनुसार पोषक तत्वों के इस्तेमाल पर विशेष जोर दिया जा रहा है। कृषि विभाग के अनुसार अभियान का उद्देश्य रासायनिक उर्वरकों के अनावश्यक इस्तेमाल को कम करना और जमीन की प्राकृतिक उर्वरा शक्ति को सुरक्षित रखना है।

अभियान के तहत रांची के ICAR-IIAB में 30 अक्टूबर को कृषि इनपुट वितरण कार्यक्रम आयोजित किया गया। इसमें किसानों को बैटरी चालित स्प्रेयर, सब्जी किट, उन्नत बीज और नैनो यूरिया जैसे कृषि इनपुट उपलब्ध कराए गए। संस्थान ने झारखंड के पांच जिलों में 5,000 से अधिक किसानों तक पहुंचने का लक्ष्य रखा है।

वहीं, गुमला में 3,000 से अधिक किसानों को मृदा परीक्षण, जैविक खाद, फसल चक्र और वर्षा जल संरक्षण का प्रशिक्षण दिए जाने की रिपोर्ट है। रांची के नामकुम क्षेत्र में भी नुक्कड़ नाटक के माध्यम से किसानों को जागरूक किया गया है।

अभियान के तहत धान कटाई के बाद खाली रहने वाली जमीन पर दलहन की खेती को भी प्रोत्साहित किया जा रहा है। इससे किसानों की अतिरिक्त आय और कृषि भूमि की उत्पादकता बढ़ाने की उम्मीद है।

हालांकि, अभियान का वास्तविक प्रभाव आने वाले समय में मिट्टी की गुणवत्ता, खेती की लागत और फसल उत्पादन के आंकड़ों से स्पष्ट होगा।