बदलती दुनिया में भोजन, पशु-आहार, चारा, ईंधन और स्थिरता के लिए मक्का क्रांति (M4FS) विषय पर पहला अंतर्राष्ट्रीय मक्का सम्मेलन सोमवार को हैदराबाद के जेडी कन्वेंशन सेंटर में शुरू हुआ। 2 से 4 नवंबर तक चलने वाले इस सम्मेलन में देश-विदेश के वैज्ञानिक, नीति-निर्माता, कृषि संस्थानों और उद्योग जगत के प्रतिनिधि मक्का अनुसंधान, उत्पादकता और मूल्य श्रृंखला के विकास पर मंथन कर रहे हैं।
डीएआरई के सचिव एवं आईसीएआर के महानिदेशक डॉ. एम.एल. जाट ने बताया कि भारत में मक्के का उत्पादन लगभग 55 मिलियन टन पहुंच गया है। उन्होंने अगले दशक में इसे बढ़ाकर 75 मिलियन टन करने का लक्ष्य निर्धारित करने और तकनीकी नवाचार, बेहतर फसल प्रबंधन तथा संसाधनों के कुशल उपयोग से उत्पादकता में 1.5 गुना वृद्धि पर जोर दिया।
उन्होंने पारंपरिक 4एफ (फूड, फीड, फॉडर और फ्यूल) विजन को किसानों को केंद्र में रखकर 5एफ तक विस्तारित करने की आवश्यकता बताई। साथ ही, किसानों की आय बढ़ाने, उपज के अंतर को कम करने और मजबूत बीज प्रणाली विकसित करने पर बल दिया।
आईसीएआर के उप महानिदेशक (फसल विज्ञान) डॉ. डी.के. यादव ने मक्के को खाद्य, पोषण और ऊर्जा सुरक्षा की महत्वपूर्ण फसल बताया। उन्होंने पिछले पांच वर्षों में विकसित 329 हाइब्रिड किस्मों का उल्लेख करते हुए अनुसंधान, मशीनीकरण और सार्वजनिक क्षेत्र में गुणवत्तापूर्ण हाइब्रिड बीज उत्पादन बढ़ाने की आवश्यकता जताई।
प्रख्यात मक्का वैज्ञानिक पद्मश्री डॉ. एस. वसल ने किसानों की जरूरतों के अनुरूप किफायती प्रजनन तकनीकों को बढ़ावा देने की बात कही। वहीं, पूर्व आईसीएआर महानिदेशक डॉ. आर.एस. परोदा ने उन्नत ब्रीडिंग, जर्मप्लाज्म संरक्षण, मजबूत वैल्यू चेन और एफ्लाटॉक्सिन प्रबंधन पर जोर दिया।
सम्मेलन में वैज्ञानिक प्रकाशनों का विमोचन और उत्कृष्ट वैज्ञानिकों को सम्मानित भी किया गया। इसमें मक्का उत्पादन, पोषण गुणवत्ता, बीज उपलब्धता और टिकाऊ मूल्य श्रृंखला के विकास के लिए किसान-केंद्रित अनुसंधान एवं सहयोग को प्रमुख प्राथमिकता बताया गया।
